When Heisenberg met Tagore! #quantumphysics #philosophy #consciousness
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हज़नबर्ग गंगा जी के किनारे बैठे गंगा नदी के पानी को बहते देख रहे थे और उनके दिमाग में अनसर्टेनिटी प्रिंसिपल घूम रहा था और उसी के साथ घूम रहा था वो डर कि मनुष्य जो ब्रह्मांड के बारे में आज तक जानता आया है क्या वह सब कुछ गलत है दोपहर में उनको रवंद्र नाथ टैगोर जी से मिलना था हज़नबर्ग गुरुदेव जी के बारे में बहुत सुन चुके थे क्योंकि जब से गुरुदेव जी ने नोबेल पुरस्कार जीता था तब से जर्मनी में बहुत प्रसिद्ध हो गए थे। इनफैक्ट हज़नबर्ग की मां को तो गुरुदेव के अंदर लॉर्ड जीसस दिखते थे। इसीलिए हजनबगर्ग को गुरुदेव जी से मिलना था और जर्मनी में आचार्य जगदीश चंद्र बसू जी के नेफ्यू देवेंद्र मोहन बसू जी उनके मित्र बन गए थे तो उन्होंने गुरुदेव जी से मीटिंग को अरेंज करवाया था। गुरुदेव के रूम में घुसने से पहले देवेंद्र जी हज़नबर्ग के कान में कहते हैं कि गुरुदेव की विज्ञान पर भी गहरी समझ है और इतना कहकर वहां से चले जाते हैं। 68 साल के गुरुदेव और 28 साल के हज़नबर्ग के बीच में जो बात हुई उसने पूरे मानव इतिहास को बदल दिया। क्योंकि हज़नबर्ग के मन में यह दुविधा थी कि सूक्ष्म स्तर पर मैटर इतना अनसर्टेनली क्यों बिहेव करता है? इतनी रैंडमनेस क्यों है? क्या हज़नबर्ग के रिसर्च में कोई कमी है? क्योंकि अगर हज़नबर्ग सही है तो न्यूटन गलत हो जाएंगे। और यहां पर गुरुदेव से पता चला कि मैटर फंडामेंटल नहीं है। फंडामेंटल तो कॉन्शियसनेस है। और विज्ञान ने आज तक जितना भी ब्रह्मांड के विषय में जाना है वह सब ह्यूमन कॉन्शियसनेस ने ही रचा है। अब तुम्हारी बुद्धि ने ऑर्डर को सच मान लिया इसलिए डिसऑर्डर से डरने लगी। लेकिन कॉन्शियसनेस बुद्धि के परे है। वह ब्रह्मांड को रचती है और वह तुम्हारे अंदर भी है। इस मीटिंग के बाद हजनबर्ग अपना कुछ समय हिमालय की पहाड़ियों में गुजारते हैं और यूरोप जाने से पहले सुब्रमण्यम चंद्रशेखर जी के साथ कांचीपुरम और महाबलीपुरम के मंदिरों में घूमते हैं। और फिर यूरोप वापस आने के बाद 3 साल के बाद उनको क्वांटम फिजिक्स के डेवलपमेंट के लिए नोबेल पुरस्कार मिलता है। और जब 1972 में वो फ्रिड कापरा से मिलते हैं तो वहां पर वह बताते हैं कि क्वांटम फिजिक्स के जो विचार यूरोपियंस को अनसेटल कर रहे थे। वह भारतीय ऋषियों के दर्शनों में प्राइमरी विचार थे। जिसके बाद से उनके मन की जो बेचैनी थी वह समाप्त हो गई। साथियों अगर आपको भी भारतीय दर्शनों से जुड़ना है तो इस विजय दशमी हमारे शिक्षण ऐप पर दर्शनों की क्लासेस से जुड़े आपको डिस्काउंट भी मिलेगा। लिंक डिस्क्रिप्शन में उपलब्ध